Saturday, 10 December 2011

हम भगवान से हमेशा वो मांगते हैं जो हम चाहते हैं...

हम भगवान से हमेशा वो मांगते हैं जो हम चाहते हैं। कभी ये भी सोचिए कि भगवान क्या चाहता है। जब भी कोई घटना आपके खिलाफ घट जाए तो धर्य मत खोइए, उसमें अपने लिए सकारात्मक ढूंढ़िए, संभव है जिसे आप अब तक अनदेखा कर रहे थे, वो ही आपके लिए श्रेष्ठ हो। कभी परमात्मा के किए का विरोध न करें।कई बार जीवन में जो हम चाहते हैं वह नहीं होता और ईश्वर क्या चाहते हैं यह हम समझ नहीं पाते हैं। जो लोग धार्मिक होते हैं वे ऐसी स्थिति में और परेशान हो जाते हैं। अधार्मिक लोग तो ऐसी स्थितियों में अपने तरीके से उत्तर ढूंढ लेते हैं। परंतु धार्मिक लोग मनचाहा हो इसे अपना हक मानते हैं। कई लोग तो शब्दों की इस गरिमा को भी लांघ जाते हैं कि जब इतना सब भगवान, ईश्वर, परमात्मा को मानते-पूजते हैं तो फिर भी चाहा काम न हो तो क्या मतलब? पूजापाठ, धर्मकर्म का? इसे समझना होगा। जिसने चाह बदल ली वह धार्मिक नहीं होता, धार्मिक वह होता है जिसने चाह समझ ली।आइए राजा दशरथ के जीवन के एक प्रसंग से समझें। उनकी इच्छा थी राम अवध की राजगादी पर बैठें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जिन्हें राम जैसी मूल्यवान संतान प्राप्त हो गई हो, उनके मन की मुराद भी पूरी नहीं हुई। बहुत बारीकी से देखें तो हम कहीं दशरथ में नजर आ जाएंगे। दशरथ की चाह थी राम राजा बनें पर चाहत में कैकयी थीं। दशरथ के धार्मिक होने में कोई संदेह नहीं है लेकिन उनका कैकयी से आचरण विलासी हो गया था। भक्ति और वासना एकसाथ कैसे हो सकते हैं। राम और काम साथ-साथ रखने का परिणाम राम राज्य चौदह वर्ष के लिए दूर हो जाना।...
इसलिए धार्मिक लोग अपनी चाह को ईश्वर से जोड़ें और सावधानी, शुद्धता से जोड़ें। होने दें जो हो रहा है। आपकी इच्छा का हो जाना बढ़िया है पर यदि न हो तो वह परमात्मा की मर्जी का हो जाना मानें वह उससे श्रेष्ठ हुआ मानें।...

Friday, 9 December 2011

ऐसा है पैसा !!!

आज के युग में ९५% लोगो को पैसे से ज्यदा प्यार है | पैसे के लिए  आदमी कुछ भी कर सकता है, एक भाई अपने भाई का खून कर सकता है, भाई अपनी बहिन को बेच सकता है और एक बेटा अपने पिता को मौत की नींद सुला सकता है | सबसे  ज्यादा प्यारा पैसा ही है चाहे  वह ५ वर्ष बच्चा ही क्यों न हो | पैसा है ऐसा जो दो भाइयो और दो मित्रो में दुश्मनी करादे | 
गरीब मजदूरी कर के पैसा कमाता है और नेता देश से गद्दारी कर के अपना पेट पालते है | इसीलिए तो वह लोग जेल जाकर अपने पेट में दर्द का बहाना करते हैं और उन्हें एक अछे वातानुकूलित कक्छ में स्थानांतरित कर दिया जाता है | क्यों न करे बेचारे इतनी म्हणत कर करके तो पैसा कमाते हैं, गरीबो के पेट काटते है और पैसा कमाने में रात-दिन एक करते हैं | ऐसे भ्रष्ट नेताओ को तो चीन की सीमा पर भेज देना चाहिए जहाँ हमारे देश के सपूत अपनी जान हथेली पर लिए और उन्हें ये भी नहीं पता होता की कब उन्हें मौत से गले मिलने पड़े| इन सभी जवानो की माएं भगवन से यही दुआएं करती है की हे भगवन मेरे बेटे को मेरी उम्र लग जाये और वो सही सलामत रहे | 
और हाँ हमारा जितना भी काला धन स्विस बैंक में जमा है अगर वह वापस आजाये तो भारत देश फिर से सोने की चिड़िया कहलाने लगेगा | लेकिन कुछ अछे लोगो के द्वारा काले धन का मुद्दा उठाने से बड़े नेता-राजनेताओ  का चिठ्ठा खुलने ही वाला था इसी लिए उल्टा अछे लोगो को ही फस दिया और उनके ऊपर पुलीस के द्वारा लाठी चार्ज करवा दिया |
और यदि हम सब भी उन अच्छे लोगो का साथ देने के लिए उनके साथ खड़े हो तो भारत का कला धन भारत में वापिस आसकता है |
आखिर हम सब कब तक चुप बैठेंगे ???
 जय शनि देव ||| :-)

Friday, 16 September 2011

धर्म का सूरज डूब रहा है निंशा अधर्मी आयी है...

अपना खो ईमान आदमी तकता चीज परायी है |
धर्म का सूरज डूब रहा है निशा  अधर्मी आयी है ||

दोष ढूँढता औरों में जो अपना दोष छिपाने को |
बगली घूँसा मर रहा है अपना काम बनाने को ||
भूल गया रिश्ते नाते इतनी बेशर्मी छाई है|
धर्म का सूरज डूब रहा है निंशा अधर्मी आयी है ||

ऐसे भी तो बहुत मिले हैं जो दानी कहलाते है |
मौका लगते माल दुसरो का भी चट कर जाते हैं ||
करते बात करोडो की पर नहीं जेब में पायी है |
धर्म का सूरज डूब रहा है निंशा अधर्मी आयी है ||

बना फिरे बहुरुपिया खोकर आन, मान, निज शान को |
नर पिशाच बन मिटा रहा अपनों के नाम निशान को ||
स्वार्थ बना है सब कुछ उसका भूला सब असनायी है |
धर्म का सूरज डूब रहा है निंशा अधर्मी आयी है ||

माँ बहनों की इज्जत का भी वह तो दाब लगाता है |
बहता खून देखकर भी जो जरा नहीं घब्टता है ||
अपने गिरने की खातिर जो "देव" खोद रहा खायी है |
धर्म का सूरज डूब रहा है निंशा अधर्मी आयी है ||









Wednesday, 14 September 2011

झूठा गर्व ...

सारे के सारे झूठे हैं, कोई कहता है कि हमे हिंदी भाषा पर गर्व है तो कोई कहता है कि हमें हिंदी बोलने में फक्र महसूस होता है.
सब एक नंबर के चिंदी चोर हैं...अंग्रेजी बोले बिना तो किसी का खाना भी हजम नहीं होता ...
अगर कोई किसी से बोले कि पुरे एक दिन सिर्फ हिंदी भाषा का उपयोग करो तो कोई कर नहीं सकता क्योकि बिना अंग्रेजी के तो कोई वाक्य ही पूरा नहीं कर सकता ..................
भाई लोगो आज के ज़माने में तो यह कहावत मशहुर है कि  हिंदी हमारी माता है और अंग्रेजी हमारी पत्नी.........
क्योकि माता तो उम्र के शुरूआती दिनों में ही काम आती है और पत्नी पुरे जीवन भर .........
इसका उधारण यह है कि अगर किसी व्यक्ति पर अंग्रेजी नहीं आती तो उसे कोई अच्छी नौकरी नहीं मिल सकती ...... 



Saturday, 9 July 2011

GAZAL(dard e dil)

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